कुछ यू होता, तो अच्छा होता !

shradhanjali

कुछ यू होता, तो अच्छा होता,
आपकी दुवाओ के साथ, सर पर हाथ सदा होता,
तो अच्छा होता !

कुछ लम्हें और मिल जाते, आपको जीने के लिए,
चन्द मुलाकातें और कर पाते,
तो अच्छा होता !

यू तो भूले से कभी आपको, भुला न पाएंगे हम,
मगर यादों में न सिमट जाते,
तो अच्छा होता !

अपनो को छोड़कर, अपनो की दुनिया में चले गए,
यू अश्क आँखों में छोड़कर, ना जाते,
तो अच्छा होता !

रोती हैं ये आँखें, आपको सोच कर “छामा”,
काश की फिर, अश्क मेरे पोछ जाते,
तो अच्छा होता !

क्यों लिखा कर लाएं थे, इतनी छोटी सी ज़िन्दगी,
कुछ बहारे और देख जाते,
तो अच्छा होता !

अपनो के मसलातों में, उलझी रही ये ज़िन्दगी,
कुछ अपने लिए भी “जी” पाते,
तो अच्छा होता !

कुछ यू होता, तो अच्छा होता,
आपकी दुवाओ के साथ, सर पर हाथ सदा होता,
तो अच्छा होता !

मंजू “माहीराज”
दिनांक: 01-12-2016
समर्पित स्व0 प्यारी छामा “मौसी”
http://www.mahiraj.wordpress.com
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