हमे भी ज़िद हैं..

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हमे भी ज़िद हैं आसमाँ से एक तारा हम लेकर रहेंगें,
कभी डुबोया था साहिल ने किनारा हम लेकर रहेंगें,
ना खिलने दिया था फूल जिस उपवन में माली ने,
अगली बहार में उस गुलशन का नज़ारा हम लेकर रहेंगें

मंजू”माहीराज”

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कोशिश…

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बूझते सूरज से एक चिराग़ जलाने की कोशिश की हमने
रात अमावस से अंधेरा मिटाने की कोशिश की हमने
बारिश की चंद  बूँदो में सागर की गहराई  ढूंढी
और पतझड़ में फिर सावन को लाने की कोशिश की हमने

मंजू”माहीराज”

मुद्दतो बाद फिर तन्हाई से हमने मुलाकात की..

मुद्दतो बाद फिर तन्हाई से हमने मुलाकात की
तुझ संग बीते हर लम्हें की उससे बात की
मुस्कुरा दिए जब पूछा दिल ने कहा हैं वो
अपनी  खुशियाँ तुमने जिसके नाम की.

मंजू”माहीराज”

आँखो में बसाया तुमको, तो आँसुओ को पाया..

आँखो में बसाया तुमको, तो आँसुओ को पाया,
ख़्वाबो में सजाया तुमको, तो  तन्हा रातों को पाया,
हर मोड़ पर खुशियाँ ढूढ़तें थे, तेरी ख़ातिर,
ओर बदले में गमों की सौगातों को पाया.

मंजू”माहीराज”

किसी को पलकों पर बिठाना और फिर गिरा देना..

 

किसी को पलकों पर बिठाना और फिर गिरा देना, आप की आदत हैं,
कभी अपना बताना और फिर ठुकरा देना, आप की वफ़ा हैं,
शामिल कर किसी को अपनी ख़ुशी में रुला देना, ये आप की अदा हैं,
खुदा करें कोई आपसा आपको भी मिले, यहीं आपकी सज़ा हैं.

 मंजू”माहीराज”

फिर जा पड़े मेरे कदम

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फिर जा पड़े मेरे क़दम, उन यादों की दहलीज पे,
जहाँ बिखरे थे सब वादे, टूट कसमो की ज़ंजीर से,
था आँसुओ का दरिया जहाँ, सूनी पड़ी ज़मीन पे,
और टटोलती हैं ये नज़रें तुम्हे, एक धुंधली पड़ी तस्वीर में

मंजू”माहीराज”

तनहा शाम

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तनहा शाम फिर ढली, डूबते सूरज की तरहा,
रात चाँदनी की आगोश में, फिर झूमी तमन्ना सितारो की तरहा,
भोर की सतरंगी किरणों सी पुलकित होती, फिर आशाएँ मेरी,
और दौड़ती फिरती चंचल किरणों सी, मेरे मन मस्तिष्क में

मंजू”माहीराज”

उनकी याद में..

वो बेख़बर होकर हमसे, हमारे दर से गुज़र गये,
हम सर पटकते हैं दहलीज़ पर, आज भी उनकी याद में

मंजू”माहीराज”

अश्क उसकी आँखो में थे..

जो मिटाने चला वो, दिले-वर्क से मेरा नाम,
एक बूँद ही सही, अश्क उसकी आँखो में थे

मंजू”माहीराज”

सुना था टूट जाते हैं ख्वाब..

सुना था टूट जाते हैं ख्वाब,
जो आँखो में बसाया, तो जाना,
सुना था छूट जाता हैं हाथ,
जो तुम्हे थमाया, तो जाना,
शम्मा की रोशनी से क्यू कायम हैं महफ़िल,
जो एक चिराग बुझाया, तो जाना

मंजू”माहीराज”

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