तेरी खुशबू मेरे तन बदन को, आज भी महकाती हैं..

pink-bunch

तेरी  खुशबू मेरे तन बदन को, आज भी महकाती  हैं
तेरे उन अनछुए स्पर्श को, रोम-रोम में जगाती हैं,

कभी  हथेलियों और कभी बालो को सहलाती हैं
कभी अठखेलिया करते हुए, सांसो को बहकाती हैं,

कभी ये दूर से मचलते हुए,  अरमा जगाती हैं
कभी अधखुली आँखो में मेरी, ख्वाबो को  सजाती हैं,

कभी झींझोर कर मुझको, तेरी यादों के दामन से
तेरे ना साथ होने की चुभन, दिल में बढ़ाती हैं,

तेरी  खुशबू मेरे तन बदन को आज भी महकाती हैं……………..

मंजू”माहीराज”

मैं जानती हू वो ज़िंदा हैं, मैं मातम मनाऊ कैसे..

मैं जानती हू वो ज़िंदा  हैं, मैं मातम मनाऊ कैसे,
जो हँस रहा हैं मुझ पर, उसकी आँखो में अश्क मैं लाऊ कैसे,
बड़ी बेतकल्लुफि से तोड़ा था, मेरा दिल जिसने,
उस शक्स को अपना, दर्दो-गम मैं जताऊ कैसे,
मैं जानती हू वो ज़िंदा हैं, मैं मातम मनाऊ कैसे

अक्सर छलक पड़ता हैं वो, आँखो से अश्क बनके,
उसके इस अक्श को, ज़माने  से मैं छुपाऊ कैसे,
मैं जानती हू वो ज़िंदा हैं, मैं मातम मनाऊ कैसे,

उसने तो दफ़ना दिया, मेरी हर याद को,
मैं उसकी अस्थियो में, आग लगाऊ कैसे,
जो बट रहा हैं गैरो में, उसकी याद इस दिल से में मिटाऊ कैसे,
मैं जानती हू वो ज़िंदा हैं, मैं मातम मनाऊ कैसे
जो हँस रहा हैं मुझपर, उसकी आँखो में अश्क  मैं लाऊ कैसे

मंजू”माहीराज”

Dhula-dhula paya..

Is dil ne chaha likhna pyaar ke nisani ret pe,

Jo aai ek lehar to sub dhula-dhula,

 

Fir chaha nada ne mausam ka rukh badalna,

Jo bahaar aai to fir sub dhula-dhula,

 

Fir chaha raat ko du or gehrai,

To chandani se sub dhula-dhula,

 

Fir chaha ghataoo se barasna,

Jo aankh chalki to sub dhula-dhula,

 

Fir chaha likhna jo har zajbaat ko,

To paya yaado ka pehlu dhula-dhula,

 

Socha ke kehdu har baat uske dil say,

Jo pada aankho me to apya khud ko he dhula-dhula…….

 

Manju”Mahiraj”