
हमे भी ज़िद हैं आसमाँ से एक तारा हम लेकर रहेंगें,
कभी डुबोया था साहिल ने किनारा हम लेकर रहेंगें,
ना खिलने दिया था फूल जिस उपवन में माली ने,
अगली बहार में उस गुलशन का नज़ारा हम लेकर रहेंगें
मंजू”माहीराज”
April 23, 2009 at 7:15 am (sayari)
Tags: आसमा, गुलशन, ज़िद, तारा, नज़ारा, फूल, माली, साहिल

हमे भी ज़िद हैं आसमाँ से एक तारा हम लेकर रहेंगें,
कभी डुबोया था साहिल ने किनारा हम लेकर रहेंगें,
ना खिलने दिया था फूल जिस उपवन में माली ने,
अगली बहार में उस गुलशन का नज़ारा हम लेकर रहेंगें
मंजू”माहीराज”
April 18, 2009 at 11:29 am (sayari)
Tags: चिराग़, पतझड़, बारिश, बूँदो, रात, सावन, सूरज

बूझते सूरज से एक चिराग़ जलाने की कोशिश की हमने
रात अमावस से अंधेरा मिटाने की कोशिश की हमने
बारिश की चंद बूँदो में सागर की गहराई ढूंढी
और पतझड़ में फिर सावन को लाने की कोशिश की हमने
मंजू”माहीराज”
April 15, 2009 at 10:45 am (sayari)
Tags: खुशियाँ, तन्हाई, दिल, मुद्दतो, लम्हें
April 15, 2009 at 10:38 am (sayari)
Tags: आँखो, आँसुओ, ख़्वाबो, खुशियाँ, गमों, तन्हा
April 15, 2009 at 6:37 am (sayari)
Tags: अदा, आदत, ख़ुशी, खुदा, ठुकरा, पलकों, वफ़ा, सज़ा
April 1, 2009 at 11:30 am (sayari)
Tags: कदम, कसमो, दहलीज़, धुंधली, यादों, वादे, सूनी

फिर जा पड़े मेरे क़दम, उन यादों की दहलीज पे,
जहाँ बिखरे थे सब वादे, टूट कसमो की ज़ंजीर से,
था आँसुओ का दरिया जहाँ, सूनी पड़ी ज़मीन पे,
और टटोलती हैं ये नज़रें तुम्हे, एक धुंधली पड़ी तस्वीर में
मंजू”माहीराज”
March 31, 2009 at 5:22 am (sayari)
Tags: आशाएँ, चंचल, तनहा, मन, शाम, सतरंगी

तनहा शाम फिर ढली, डूबते सूरज की तरहा,
रात चाँदनी की आगोश में, फिर झूमी तमन्ना सितारो की तरहा,
भोर की सतरंगी किरणों सी पुलकित होती, फिर आशाएँ मेरी,
और दौड़ती फिरती चंचल किरणों सी, मेरे मन मस्तिष्क में
मंजू”माहीराज”
March 5, 2009 at 8:09 am (sayari)
Tags: गुज़र, दर, दहलीज़, बेख़बर
वो बेख़बर होकर हमसे, हमारे दर से गुज़र गये,
हम सर पटकते हैं दहलीज़ पर, आज भी उनकी याद में
मंजू”माहीराज”
March 5, 2009 at 8:07 am (sayari)
Tags: आँखो, दिले-वर्क, नाम, मिटाने
जो मिटाने चला वो, दिले-वर्क से मेरा नाम,
एक बूँद ही सही, अश्क उसकी आँखो में थे
मंजू”माहीराज”
March 2, 2009 at 9:53 am (sayari)
Tags: आँखो, ख्वाब, चिराग, टूट, महफ़िल, रोशनी, शम्मा
सुना था टूट जाते हैं ख्वाब,
जो आँखो में बसाया, तो जाना,
सुना था छूट जाता हैं हाथ,
जो तुम्हे थमाया, तो जाना,
शम्मा की रोशनी से क्यू कायम हैं महफ़िल,
जो एक चिराग बुझाया, तो जाना
मंजू”माहीराज”